मौत का सच मुक्तक (15)
जिसने जन्म लिया है उसे मौत का कहर पाना होगा,
भले ही सूर्य अभिमान करे पर शाम को ढल जाना होगा !
कोन सा समागम यहाँ पर स्थायी हुवा है बंधू रे,
जो आया है उसे एक ना एक दिन गुजर जाना ही होगा !!
श्रेणिक जैन
जिसने जन्म लिया है उसे मौत का कहर पाना होगा,
भले ही सूर्य अभिमान करे पर शाम को ढल जाना होगा !
कोन सा समागम यहाँ पर स्थायी हुवा है बंधू रे,
जो आया है उसे एक ना एक दिन गुजर जाना ही होगा !!
श्रेणिक जैन
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