Friday, 9 March 2012

जीवन में गिरावट क्यों ?

विचार :-
जहाँ दिखावट, बनावट, सजावट, मिलावट और कड़वाहट होती है, वहाँ जीवन में नियम से गिरावट ही होती है, जीवन में फिर मुस्कुराहट नहीं ठहर पाती !
अतः हठ, वट, नट, कट को झट-पट छोड दें, और फटा-फट अपने आपको अपने आप से जोड़ दें, यही जीवन की सार्थकता का उपाय है !
श्रेणिक जैन .........
ओम् नमः उत्तम क्षमा पाप क्षय पुण्य जमा........

चाहे जो करो दुनिया आपको जीने नहीं देगी ....!!!!

विचार :-
आप चाहे जो मर्ज़ी कर लीजिए लोग हमेसा आपको कुछ ना कुछ कहेगे ही....ये दुनिया आपको किसी भी रूप में जीने नहीं देगी इसका सबसे बड़ा उदाहरण मैं आपके सामने रख रहा हू !
अगर कोई इंसान दिन भर मेहनत करे तो लोग कहते है की पैसे के लिए मरता है 
मेहनत ना करे तो निख्खटू..........
कम मेहनत करे तो घर वालो का ख़याल नहीं रखता......
पैसा खर्च करो तो फिजूलखर्ची...........
ना करो तो सुनने को मिलता है कंजूस मक्खीचूस.......
और सुनिए 
आपके पास पैसा बहुत हो तो कहा जाता है 2 नंबर का है 
कम पैसा हो तो कहा जाता है अक्ल होती तो ये हालत ना होती 
और जिंदगी भर के पैसे के बारे में कहते है की पैसे का सुख नहीं भोगा तो कमाया ही क्यों ?
श्रेणिक जैन 
ओम् नमः पाप क्षय पुण्य जमा 

Thursday, 8 March 2012

बहुत बहुत धन्यवाद

आज कोई विचार नहीं आज सिर्फ मेरे सभी पाठकों को मेरा हाथ जोड़ कर जय जिनेन्द्र और साथ ही साथ बहुत बहुत धन्यवाद क्योकि आज मेरे ब्लॉग को पूरा एक महीना हो गया और इसे 2000 ( Excluding me ) से ज्यादा लोगो से पढ़ लिया !
और साथ साथ मैं क्षमा प्राथी भी हू अगर मुझसे कोई गलती हुई हो !
तो सब ऐसे ही पढते रहे और आप मुझे अपनी ID से Follow भी कर सकते है..........!!!!

comment से डरते लोग


कुछ लोग Comment or Follow करने मे ऐसे डरते हैं
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जैसे बिना टिकिट ट्रेन मे सफर कर रहे हों और Ticket Checker बस आने को हो.....

जैसे जूते चुराई की रस्म से पहले दूल्हा.....

जैसे पहली बार नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जा रहे हों और आपका ही नंबर आने वाला हो.....

जैसे रोमिंग मे कॉल रिसीव कर रहे हो और मोबाइल में केवल २ रूपए हो ....

जैसे साथ में गर्लफ्रेड हो और जेब में बहुत कम पैसे हों.....

जैसे बाईक मे बिना हल्मेट जा रहे हो और आगे चेकिंग चल रही हो.....

जैसे लडका पहली बार किसी लडकी को प्रेम प्रस्ताव दे
रहा हो और उसके भाई से मार खाने का डर हो............!!!!!!

श्रेणिक जैन
उत्तम क्षमा पाप क्षय पुण्य जमा

Wednesday, 7 March 2012

होलिका दहन कितना उचित ?

विचार :-
आज मैंने देखा जगह जगह होलिका के रूप में एक लकडियों का ढेर बना हुआ जिसमे आग लगाकर लोग उसे होलिका दहन कहते है !
मुझे नहीं पता की धर्म के हिसाब से ये कहा तक उचित है लेकिन मै तो सिर्फ इस पर अपना विचार रखना चाहता हू क्योकि मेरे विचार ये बिलकुल भी उचित नहीं है क्योकि :-
१. पहला कारण तो हमारे अंदर इतनी बुराई भरी हुई है हमे अगर वास्तव में होलिका दहन करना है तो हमें सबसे पहले उन बुराइयो को मिटाना चाहिए तभी वास्तव में हमें होलिका दहन का वास्तव में मतलब सिद्द हो सकता है !
२. और दूसरा इस दिन इतनी लकडियों को जलाया जाता है जिसका वास्तव में कोई भी ओचित्य मुझे नज़र नहीं आता क्योकि इससे हमारे पर्यावरण में निरंतर पेडो की संख्या ओर घट जायेगी जो हमारे पर्यावरण के संतुलन के लिए ओर घातक है !
३.तीसरा कारण एक ये भी है की जितनी लकडिया जलती है उसे ना जाने कितने आस पास  के पेड पोधे ओर सबसे ज्यादा कीट पतंगे और ना जाने कितने सूक्ष्म जीव झुलस कर मर जाते है !
श्रेणिक जैन
ओम् नमः पाप क्षय पुण्य जमा 

होली में खुशी या गम

विचार :-

क्या आपको नहीं लगता की आज भगवान को अपनी छुद्र(छोटी और गन्दी) राजनीति का जरिया बना कर धर्म के तथाकथित संरक्षक बन बैठे एक नहीं अनेको हिरण्यकश्यप सारे देश में घूम-घूमकर रंगों की होली की जगह खून की होली खेल रहे हैं ।

अपने विश्वास को संविधान , कानून , राष्ट्र और जनता से ऊपर और अपने किये कार्यों को ही देश का कानून समझने वाले ये हिरण्यकश्यप देश की जनता की एकता , सद्भावना, परस्पर विश्वास और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर अपनी कूटनीति वाली चालों से हर वक्त हर छन आघात कर रहे हैं । अपनी बहन होलिका रूपी साम्प्रदायिकता के माध्यम से कई निर्दोष और मासूमों को अपना शिकार बना रहे हैं

जो व्यक्ति या संगठन इनके विचारों से असहमति रखते हैं उन्हें सबक सिखाना,डराना,धमकाना ,मार-पीट करना,सभा बिगाड़ना,पुतला जलाना और अन्त में दमन कर कर के हत्या तक कर देना इन हिरण्यकश्यपों की दृष्टि में पवित्र धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है ।

धर्म और भगवान के ठेकेदार बने स्वयंभू हिरण्यकश्यपों और साम्प्रदायिकता रूपी होलिका रुपी समाज की मर्यादा का हर वक्त बलात्कार तक करने से पीछे नहीं हट रहे क्या ये होलिका का सच्चा मर्म नहीं है

जब इतने बड़े बड़े हिरण्यकश्यप तक इस दुनिया में घूम रहे है तो कहा तक होलिका का दहन न्यायसंगत है ? खुद सोचिये..........!!!!!!!!

श्रेणिक जैन

होलिका दहन

विचार :-
मैंने सुना है की होली के पर्व पर रात को होलिका दहन किया जाता है,
क्या ऐसा नहीं हो सकता है की होलिका दहन पर हम उस दहन में अपने अंदर छिपी बुराई, कुरीतियों, छोटो के प्रति हमारे अन्याय करने की प्रवर्ती को भी जला दे ??
जहा तक मैंने सुना है कुछ परम्पराओ के अनुसार होलिका दहन इसीलिए किया जाता है क्योकि इस दिन बुराई ( हिरण्यकश्यप ) पर अच्छाई ( प्रहलाद ) की जीत हुई थी तो क्या हम अपने अंदर की बुराई को मिटा कर उस पर सच्चाई और धर्म की जीत नहीं करेगे !