Sunday, 8 April 2012

धन या लक्ष्मी की चंचलता

विचार :-
मैंने बहुत से अमीर लोगो को देखा की वो हमेसा निश्चित होते है और समझने लगते है की उन पर तो कुबेर ( चिरपरिचित कथा के अनुसार  धन और वैभव के देव ) या लक्ष्मी ( चिरपरिचित कथा के अनुसार धन और वैभव की देवी ) तो उन पर महरबान है और अब उन पर तो कभी मुसीबत आ ही नहीं सकती लेकिन मेरे विचार से ये नजरिया गलत है !
क्योकि मेरे विचार से तो बुरे कर्मो का उदय कभी भी हो सकता है और जैसे ही कर्मो के उदय होता है अच्छे से अच्छा इंसान रास्ते पर आ जाता है क्योकि लक्ष्मी स्वभाव से ही चंचल होती है आज यहाँ तो कल वहाँ होती है !
इसीलिए नजरिया बदले और प्रभु का नाम हमेसा याद रखे क्युकी प्रभु के नाम में ही शक्ति का वास होता है और आपको बिना मागे ही सब अपने आप ही मिल जाता है !
श्रेणिक जैन
उत्तम क्षमा पाप क्षय पुण्य जमा

Saturday, 7 April 2012

प्रार्थना भगवान से

विचार :-
मेरी तो हमेसा प्रभु से एक ही प्रार्थना होती है की भगवान अगर हम वो ना कर सके जो आप चाहते है तो हमे बस इतनी समझ दे देना की हम वो भी ना कर सके जो आप नहीं चाहते !
श्रेणिक जैन
जय जिनेन्द्र देव की
उत्तम क्षमा पाप क्षय पुण्य जमा 

Friday, 6 April 2012

सबसे विनती

विचार :-
मेरी आप सभी से एक विनती है की चाहे वो जैन हो हिंदू हो या कुछ और मेरी आप सबसे सिर्फ एक ही विनती है की अगर आप हम हिंदुस्तानियों को जोड़ नहीं सकते तो कम से कम इन पंथो और धर्मों के नाम पर मार काट तो मत मचाओ !
जब सब धर्म एक ही शिक्षा देते है अहिंसा, सत्य आदि सिदान्त ही सबके मूल मंत्र है तो फिर क्यों इन जातिवाद और धर्मवाद के चक्कर में पड़ रहे है हम लोग......आखिर क्यों ??
जय जिनेन्द्र
श्रेणिक जैन
उत्तम क्षमा पाप क्षय पुण्य जमा 

जिंदगी की जंग और हौसला

विचार :-
जिंदगी की जंग में कभी हारोगे कभी जीतोगे ,
कभी उठोगे कभी कभी गिरोगे,
इसके बावजूद उम्मीद जिन्दा रखना मेरे बंधू ,
हौसला बनाये रखना मेरे बंधू ,
रिश्ते नाते टूट जाए चिंता की बात नहीं,
बस अपना हौसला मत टूटने देना,
क्योकि हौसला जुड़ा रहे तो सब अपने आप जुड़ता जाएगा !

गिरना

विचार :-
कुछ लोग गुस्से में भी और प्यार में भी कितना कुछ कह जाते है जो कितना कुछ सिखा देता है मै अपने जीवन की ही एक घटना सुनाता हू :-
एक बार मेरा एक फ्रेंड परीक्षा में नक़ल करता हुआ पकड़ा गया था ! उसे स्कूल में और घर में बहुत डाट पड़ी और वो कुछ दिन बाद हमारे घर आया तो बहुत दुखी था तब पापा( क्योकि पापा को मैंने सब बता दिया था ) ने उसे समझाया की -"बेटा गलती किसी से भी हो सकती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं की तुम इस तरह उदास हो जाओ और सब लोग तुम्हारी भलाई के लिए ही तुम्हे डाट रहे है इसमें उदास होने की क्या बात है ?"
और फिर नीचे तो कोई भी गिर सकता है लेकिन असली इंसान वो है जो ऐसे नीचे गिरे जैसे एक झरना गिरता है क्योकि वो नीचे तो जरुर गिरता है लेकिन अपनी सुंदरता को बनाये रखता है !
मै आज भी जब ये बात सोचता हू तो ये बात मेरे दिल को छू जाती है !

Thursday, 5 April 2012

सेवा भाव सीखो हनुमान और सूर्य से

विचार :-
हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाये
आज अखबार में पढ़ रहा था और आज ही क्या आये दिन अखबार में पढता हू की एक नौकर ने मालिक को मार कर घर लूट लिया, आज यहाँ लूटा और कल वह लूटा !
क्या होता जा रहा है इस देश और देश के लोगो को, पता नहीं क्यों आखिर वो सेवा भावना जो हर नौकर के मन में मालिक के लिए हुवा करती थी कहाँ गयी वो ?
अरे अपने देश में ही देखो एक चिर-परिचित कथा के अनुसार एक बार हनुमान जी जिन्होंने अपने आराध्य राम ( जिन्हें वो अपने आराध्य कहते थे ! ) के लिए अपना सीना तक चीर दिया था !
अरे............!!!! आप आज के युग में ही देखो हमारा सूर्य ( सूरज ) जो सुबह दिन निकलते ही हमारे सामने आ जाता है सबको प्रकाश देने के लिए ! फिर चाहे गर्मी हो सर्दी हो या फिर बरसात ! हर मौसम में वो नित्य प्रतिदिन प्रकट हो जाते है !
श्रेणिक जैन
उत्तम क्षमा पाप क्षय पुण्य जमा 

अहिंसा -प्रभु महावीर की नज़र में

विचार :-
प्रभु महावीर ने अहिंसा पर विशेष जोर दिया है और हमेसा अहिंसा की ही बात कही !
उन्होंने कहा -"जगत में जीव जितने है किसी को अन्य मत देखो, सभी को प्राण प्यारे मानो , एवं किसी पर भी अपनी वासना या अपने अहंकार आदि का जाल मत फैको !"
श्री १००८ भगवान महावीर की अहिंसा ये बताती है की अगर तुम किसी जीव को प्राण दे नहीं सकते तो उसके प्राण लेने का हक तुम्हे किस ने दे दिया !
श्रेणिक जैन
जय जिनेन्द्र देव की
उत्तम क्षमा पाप क्षय पुण्य जमा