Saturday, 3 March 2012

आज़ाद देश कैसा है ? कविता (३)

देश आज़ाद हो  गया  जाने  मेरी  जबानी !
क्या सच आज़ाद हो गया सुनिए कहानी !!
     
       आतंकवाद... खून  की  बोछार देखिये
       नेताओ का अपने देश से प्यार देखिये
       कश्मीर   से   अलगाव   देखिये   और
       जनता    की    चीख    पुकार    देखिये

बापू   के  नाम  पर  झूठ  बोलते  जानी
देश आज़ाद हो गया सुनिए मेरी जबानी
   
      भूखमरी  है   देश   में  फैली तो क्या हुआ
       सोने से भरी उनकी तिजोरी तो क्या हुआ
       झोपडी   है   रोती  सिसकती तो क्या हुआ
       बंगले में कैद देश की  हस्ती तो क्या हुआ

गोरे  गए  अब  कालो  की है  ये  कहानी
देश आज़ाद हो गया सुनिए मेरी जबानी

        देखो चोर माफिया आज़ाद है यहाँ
        भेडियो  के  झुंड ही आबाद है यहाँ
        कैद  हुवे  वो  जो  बचाते  लाज  है
        आज़ाद घूम रहे लाज  बेचने वाले

गद्दारों   के   गद्दारी  की   है   ये   कहानी
देश आज़ाद हो गया सुनिए मेरी जबानी 

देवतुल्य जीव

विचार :-
जो भव्य जीव संसार के समस्त प्राणियों से योग्य क्षमा माँग लेता है और संसार के प्रत्येक प्राणियों को उनके किये गए कार्यों चाहे वो स्वेच्छा से किये हो या बिना जाने उन सबके लिए  ह्रदय से क्षमा कर देता है वही मनुष्य सही मायनों में भव्य जीव होता है, वही साधू होता है, वास्तव में वही अभिवन्द्नीय होता है, और वही वास्तव में देवत्व के पद का सच्चा अधिकारी होता है !
उत्तम क्षमा पाप क्षय पुण्य जमा
श्रेणिक जैन 

उन्नति और अवनति

विचार :-
मेरे विचार से इंसान के भविष्य का निर्धारण सिर्फ एक ही चीज़ से होता है और वो है उसके अपने कर्म.......
मेरे विचार से उन्नति और अवनति में सिर्फ इतना ही फर्क है की इंसान अगर अपने ऊपर के कर्तव्यों को यथोचित तरीके से अर्थात सही ढंग से करे तो वो निरंतर उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा अन्यथा अवनति के पथ पर बढ़ चलेगा
उत्तम क्षमा पाप क्षय पुण्य जमा
श्रेणिक जैन............

क्षमा कितना कठिन

विचार :-
मेरा मानना है कि व्रत, उपवास, संयम, स्वाध्याय, भक्ति, पूजा, दान, तपस्या, करना बहुत आसान होता है!
परन्तु यदि मै सबसे कठिन की बात करू तो मेरे विचार से जो सबसे कठिन होता है वो ये की हम किसी को दिल से उसके किये गए अपराध जो उसने जान बूझ कर किये या फिर बिना जाने किये उन सब के लिए दिल से क्षमा कर पाये!
उत्तम क्षमा पाप क्षय पुण्य जमा
श्रेणिक जैन 

Friday, 2 March 2012

दान

विचार :-
दान के चार भेद :-
दान के बारे में बताने से पूर्व में आपको सिर्फ ये बताना चाहता हू की दान का महत्व तभी है जब आप दान देते वक्त मन शुद्ध रखे और किसी भी प्रकार की इच्छा रखे बिना दान दे....

१. अभयदान ,                          २.शास्त्रदान ,
३.औषधदान ,                           ४.आहारदान

1.अभयदान : यदि कोई जीव मरण से भयभीत हो रहा है ऐसे किसी भी जीव या जीवो को जो अभय दान देना ही अभयदान कहलाता है और जो अभयदान देता है अगर मनुष्य इस दान को करता है तो भविष्य में सारे विश्व में निर्भीकता जैसे गुणों का धारी बनता है !

2. शास्त्रदान : जो पुरुष शास्त्र दान देता है,जिनागम को पढता है तथा दूसरे मनुष्यों को पढ़ने में मदद करता है यही शास्त्र दान कहलाता है और जो मनुष्य ये दान करता है वह पुरुष मति श्रुती ज्ञान आदि ज्ञान और दान दोनो को पुर्ण रुप से प्राप्त करता है !

3. औषधदान : औषधी दान देने वाला मनुष्य ही औषधि दान के पुण्य का भागी बनता है वह आने वाले भविष्य में उत्तम तेज का धारी होता है और तेज, ओजस्वी आदि गुणों का धारी होता है !

4. आहारदान : और इन सबसे ऊपर आहार दान है जिसके फल का अगर वर्णन किया जाये तो रात से दिन हो जाये लेकिन मै सिर्फ यही कहना चाहुगा की दान की अनंतानत महिमा है और आहार दान देने वाले व्यक्ति को मनचाहे फल की प्राप्ति होती है !

Thursday, 1 March 2012

धन से बुराई और भलाई

विचार :-
मेरा तोह मानना यह है की अगर धन किसी की भलाई के लिए काम आये अर्थात अगर हमारा धन किसी जरुरतमंद के काम आये तभी उसका कोई मूल्य है वरना तो ये धन आपके लिए सिर्फ बुराई का एक ढेर मात्र है जिससे जितनी जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना ही अच्छा है !
श्रेणिक जैन ........
पाप क्षय पुण्य जमा ओम् नमः 

णमोकार की गुणवत्ता और महत्ता

श्रेणिक जैन की कलम से :-
णमो अरिहंताणं
णमो सिद्धाणं
णमो आयरियाणं
णमो उवज्झायाणं
णमो लोए सव्व साहूणं !

जैन धर्म का मूल मंत्र णमोकार मंत्र है, मेरी नज़र में इस मंत्र का महत्व इसीलिए अधिक है इस मंत्र में न तो जैन धर्म के आखरी तीर्थंकर भगवान महावीर का नाम है ना ही पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का ही नाम है इसमें केवल व्यक्तित्व को नमन है ना की किसी व्यक्ति मात्र को !
एक दूसरी विशेषता ये भी लगती की इसमें कोई विषय वस्तु की मांग भी नहीं की गयी है बजाये इसके सिर्फ सबको प्रणाम किया हुवा है !
श्रेणिक जैन
उत्तम क्षमा पाप क्षय पुण्य जमा